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महिलाओं ने रखा संतान की दीर्घायु के लिए हलखष्टि का ब्रत।

दैनिक महराजगंज न्यूज़

महिलाओं को संतान की दिर्घायु के लिए भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की खष्टी के दिन हलखष्टि का ब्रत करने का प्राविधान है यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता जाता है इस दिन बलराम जी का जन्म हुआ था नौ अगस्त रविवार को पड़ने वाला यह ब्रत महिलाओं के लिए खास था बलराम जी का प्रधान शस्त्र हल तथा मूसल है इसी कारण उन्हें हलधर भी कहा जाता है उन्ही के नाम पर इस पर्व का नाम हलखष्टि या हर छठ पड़ा जन्माष्टमी के दो दिन पूर्व यह ब्रत रखा जाता है इसे बलराम जयंती के नाम से भी जाना जाता है यह ब्रत केवल पुत्रवती महिलाये ही करती है संतान की लंबी उम्र की कामना के लिए यह ब्रत रखा जाता है माताएं ब्रत पूजन के साथ अपने संतान की दीर्घायु की कामना करती है हिन्दू ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बलराम जी को हल और मूसल से खास लगाव था इसलिए इस त्योहार को हलखष्टि के नाम से जाना जाता है बलराम जयंती के दिन किसान वर्ग खास तौर पर पूजा करते है इस दिन हल मूसल और बैल की पूजा की जाती है इसलिए इस दिन हल से जुती हुई अनाज व सब्जियो व हल का इस्तेमाल सर्वथा वर्जित माना जाता है।व्रती महिलाएं रविवार को
प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नानादि से निबृत होकर स्वछ वस्त्र धारण कर पृथ्वी को गोबर से लिपाई कर एक छोटा सा तालाब बनाया जाता है इस तालाब में झरबेरी तथा पलाश की एक शाखा बनाई जाती है और उसी में हरछठ अर्थात कुश को जड़ सहित गाड़ दिया जाता है पूजा में चना,जौ,गेंहू,धान,अरहर,मक्का, सतनजा तथा मूंग,चढ़ाने के बाद धूल भरी कजरिया होली की राख होली पर भुने हुए चने तथा जौ की बाली चढ़ाया जाता है ।इस पर्व को
हलखष्टि,हलछठ,हरछठ,ब्रत चंदन छठ,तीन छठ,तिन्नी छठ,ललही छठ,खमर छठ,भी कहा जाता है इस ब्रत में गाय का दूध व दही का प्रयोग नही किया जाता है इस दिन ब्रती महिलाये रात में भैस का दूध घी,व दही,का इस्तेमाल करती है पूजा करने के उपरांत हलखष्टि की कथा का श्रवण करना शुभ फलदाई माना जाता है

अभिषेक त्रिपाठी

Founder & Editor Mobile no. 9451307239 Email: Support@dainikmaharajganj.in

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