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महराजगंज

व्यापारियों की सुगमता हेतु जीएसटी का नया कानून लिखे सरकार फैम

दैनिक महाराजगंज न्यूज़
वेद प्रकाश दुबे जोनलचीफ

जीएसटी की जटिलताओं एवं विषमताओं से परेशान हो कर व्यापारियों ने एक अनूठा प्रयास किया है। राष्ट्र के शीर्ष व्यापारिक संगठन फेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया व्यापार मंडल (फैम) द्वारा एक सामूहिक ज्ञापन देने की परंपरा शुरू की गयी है , जिसमे जिलाधिकारी के माध्यम से माननीय प्रधान मंत्री जी से जीएसटी के सरलीकरण का अनुरोध किया गया है। विगत 22 फरवरी को लगभग 200 से भी ज्यादा जिलों के माध्यम से फैम की जिला इकाई एवं अन्य सहयोगी संस्थानों द्वारा माननीय प्रधान मंत्री जी से एक नया जीएसटी कानून बनाने का आग्रह किया गया था । इसी कड़ी में दिनाक 23 मार्च 2021 को पुनः एक रिमाइंडर ज्ञापन माननीय प्रधान मंत्री जी को एवं प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी को भेजा जा रहा है। इस बार फैम की लगभग 400 से भी ज्यादा जिला इकाई इस अभियान में भाग ले रही है और एक ही मांग कर रही है कि व्यापारी वर्ग को जीएसटी की विषमताओं से बचाओ और एक नया जीएसटी बनाओ फेडेरशन ऑफ़ आल इंडिया व्यापर मंडल के महानगर अध्यक्ष श्री प्रशांत पांड ने मीडिया को बताया कि ज्ञापन के माध्यम से फैम द्वारा माननीय प्रधान मंत्री जी को अवगत कराया गया है कि भारत का परंपरागत लघु खुदरा व्यापारी, भारत की अर्थव्यवस्था में एक रीढ़ की हड्डी के समान है। वह न केवल सरकार का बोझ काम करने हेतु स्वरोज़गार करता है वरन राष्ट्र के 44 करोड़ युवाओ को भी रोज़गार प्रदान करता है।
हम यह भी आपको अवगत करना चाहते है कि जीएसटी राजस्व संग्रह में सिर्फ 20% संग्रह व्यापारियों से प्राप्त होता है जबकि 80% संग्रह उद्योग एवं सेवा क्षेत्र से प्राप्त होता है। ऐसी अवस्था में यदि लघु व्यापारियों के लिए जीएसटी के प्रावधानों को सरल एवं सुगम कर दिया जाए तो राष्ट्र का प्रत्येक व्यापारी अपना सम्पूर्ण सामर्थ्य व्यापार बढ़ाने में लगाएगा और राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में अपनी भागीदारी और ज्यादा सुनिश्चित करेगा फेडेरशन ऑफ़ आल इंडिया व्यापर मंडल के महानगर अध्य्क्ष श्री प्रशांत पांडे ने अनुस्मारक अनुरोध पत्र के माध्यम से माननीय प्रधान मंत्री जी से आग्रह किया गया है कि जिस प्रकार समय समय पर सरकार पुराने कानूनों की समीक्षा करती है और समय की मांग एवं पूर्व में हुए अनुभव के आधार पर कानूनों में संशोधन कर नया कानून बनाती है, ठीक उसी प्रकार वर्तमान जीएसटी को सरल सुगम बनाने हेतु एक नया संशोधित जीएसटी कानून पारित करे जो लघु व्यापारियों को आर्थिक एवं मानसिक उत्पीड़न से रक्षा कर सके। नए जीएसटी कानून के विषय में निम्न सुझावों का यदि अमल में लाया जाता है तो व्यापारिक वर्ग को एक बड़ी सुगमता एवं सरलता का अहसास होगा एवं व्यापारियों को स्वेच्छा से कर अनुपालन को प्रेरित करेगा फैम में मांग पत्र में मुख्यतः जीएसटी की सीमा 75 लाख वार्षिक की जानी चाहिए जीएसटी के सिर्फ 3 स्लैब करे दिए जाए जैसे कि आवश्यक वस्तुए जैसे कि खाद्य पदार्थ दवाइया आराम के वस्तुए जैसे कि कॉस्मेटिक इत्यादि विलासता की वस्तुए ऐसा करने से HSN कोड के प्रयोग की आवश्यकता ही नहीं रहेगी। आज अधिकतर व्यापारी HSN कोड में विभ्रान्ति के चलते गलती कर बैठता है और आर्थिक दंड का भागीदार बनता है। विक्रेता को जीएसटी का भुगतान करने के पश्चात भी , क्रेता व्यापारी को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल पाता क्योंकि विक्रेता व्यापारी यदि किसी भी कारणवश अपना GSTR-1. नहीं भर पाता या विक्रेता व्यापारी बदनीयती से सरकार को कर जमा नहीं करता, ऐसी अवस्था में बिना किसी गलती के करता व्यापारी दंड का भागीदार जाता है और पुनः एक बार फिरसे उसे जीएसटी भरना पड़ता है। यदि क्रेता व्यापारी जीएसटी भुगतान का सम्पूर्ण साक्ष्य देता है उसे इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त होना चाहिए और विक्रेता व्यापारी को दण्डित करना चाहिए। वर्तमान में जीएसटी की विवरणी में अनजाने हुई त्रुटि को सुधारने का कोई प्रावधान नहीं है। वेदो में कहा गया है कि गलती का अहसास होने पर उसकी पुनरावृत्ति का न होना सबसे बड़ी क्षमा है। जीएसटी में भी अनजाने अनजाने हुए त्रुटि को सुधारने का एक अवसर अवश्य देना का प्रावधान होना चाहिए। एक राष्ट्र एक कर होने की बाद भी व्यापारियों को बिल में अलग अलग IGST.,CGST.,SGST. की गणना करनी पड़ती है और इसी तरह कर का इनपुट क्रेडिट लिया जाता है और कर बैंक में जमा करना पड़ता है। यह आवश्यक है कि व्यापारी सिर्फ जीएसटी की गणना करे ,जीएसटी का भुगतान करे और जीएसटी कौंसिल टेक्नोलॉजी के माध्यम से GSTN. प्राप्त हुए कर को बहुत आसानी से IGST.,CGST.,SGST. की पृथकपृथक गणना कर दे। जी एस टी विवरणी में हुए भूल या देरी के कारण लगने वाले अनेको प्रकार के आर्थिक दंड की मात्रा बहुत ज्यादा अधिक एवं दमनकारी है। आर्थिक दंड इस प्रकार लग्न चाहिए कि व्यापारी को दंड भी मिल जाए और व्यापार भी चलता रहे।

ज्ञापन देने में अन्य व्यापारीगण श्री , मनोज अग्रवाल, तिलक बंसल ,सुमित वर्मा सतीश पांडेय-राजू शुक्ला मनोज गुप्ता विशाल ,अनिल गुप्ता ,अखिलेश त्रिपाठी भी सम्मिलित रहे

वेद प्रकाश दुबे

वेद प्रकाश दुबे प्रदेश विज्ञापन प्रभारी (लखनऊ) 7380436987

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