लखनऊ

ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धारित शैडूल्ड सापेक्ष हो रही 5 से 6 घंटे की हो रही विद्युत कटौती

लखनऊ। पूरे देश में कोयले की कमी को लेकर काफी कठिनाई सामने आ रही है।वर्तमान में उत्तर प्रदेश में भी लगभग 2500 हजार मेगावाट की उत्पादन गृह बंद है। लगभग 1300 मेगावाट बिजली की कमी इसलिए हो रही क्योकि मशीने क्षमता के अनुरूप काम नही कर पा रही। लगभग 1500 से 2000 मेगावाट की कटौती के चलते ग्रामणी शैडूल्ड में लगभग 5 से 6 घंटे की बिजली कटौती हो रही। बिजली कमी के चलते 12 से 13 घटे आपूर्ति मिल रही। उपभोक्ता परिषद ने इन तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे में प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार से बात कर कोयले की आपूर्ति बढ़वाना चाहिए। जहा उत्तर प्रदेश में एमरजेंसी में 7 रुपया प्रति यूनिट तक बिजली खरीद हो रही। उसके बाद सीलिंग लगी है पैसे की दिक्कत की वजह से हम चाह कर भी महगी बिजली नहीं खरीद सकते।बड़े दुर्भाग्य की बात है इस संकट के दौर में पावर एक्सचेंज ने 9 रुपया से लेकर 20 रुपये में बिजली बिक रही। केंद्र सरकार को इस पर भी सीलिंग लगाना चाहिए। क्योंकि प्रदेश में बिजली कम्पनियो की आर्थिक स्थित ठीक नहीं है। ऐसे में प्रदेश सरकार को इस संकट से निपटने के लिए एक आर्थिक पॅकेज का एलान भी करना चाहिए।उपभोक्ता परिषद् प्रदेश सरकार से यह भी मांग की है कि इस संकट को गम्भीरता से लेने की जरुरत है क्योंकि यह संकट आगे भी बना रह सकता है और ऐसी बीच प्रकाश पर्व दीपावली भी आ रही।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा देश में इस संकट की जो मुख्य वजह यह है देश के कोयला खदानों में पानी और विदेशी कोयले की दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी है। ऊर्जा मंत्रालय के एक आंकडे के मुताबिक 2019 में अगस्त-सितंबर महीने में बिजली की कुल खपत देश मे 10 हजार 660 करोड यूनिट प्रति महीना थी. यह आंकडा 2021 में बढकर 12 हजार 420 करोड यूनिट प्रति महीने तक पहुंच गयी है। बिजली की इसी जरूरत को पूरा करने के लिए कोयले की खपत बढी है 2021 के अगस्त-सितंबर महीने में कोयले की खपत 2019 के मुकाबले 18 प्रतिशत तक बढी है। भारत के पास 300 अरब टन का कोयला भंडार है। लेकिन फिर भी बडी मात्रा में कोयले का आयात इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों से करता है।

इंडोनेशिया में मार्च 2021 में कोयला की कीमत 60 डॉलर प्रति टन थी जो अब बढकर 200 डॉलर प्रति टन हो गई है। इस वजह से कोयले का आयात कम हुआ है। ऐसी कई वजहें हैं जिससे थर्मल पावर प्लांट्स की बिजली की जरूरत को पूरा करने के लिए कोयला नहीं पहुंच पा रहा है। इसी वजह से प्लांट के कोयला भंडार समय के साथ-साथ कम होता गया पूरे देश में कोयले की किल्लत को लेकर ज्यादातर उत्पादन गृह कम क्षमता पर काम कर रहे है जिसकी वजह से पूरे देश में विद्युत आपूर्ति पर प्रभाव पड़ा है और जिलों में विद्युत कटौती हो रहीे है।

Share this:

मनीष यादव

सम्वाददाता - चौक बाजार

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!