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आइये जानते हैं दीपदान के धार्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व को तथा क्या है-और क्यों करते हैं दीपदान

दीपक का दान करना या दीप को जलाकर उसे उचित स्थान पर रखना ही दीपदान कहलाता है। किसी दीपक को जलाकर देव स्थान पर रखकर आना या उन्हें नदी में प्रवाहित करना दीपदान कहलाता है। यह प्रभु के समक्ष अपने भाव का निवेदन प्रकट करने का एक तरीका होता है।
दीपदान का धार्मिक महत्व के साथ-साथ वैज्ञानिक भी महत्व है आइये जानते हैं दीपदान के विषय में महत्वपूर्ण बातें।

कहां-कहां करना चाहिए दीपदान..?

1- देवमंदिर में करना चाहिए दीपदान।
2 – विद्वान ब्राह्मण के घर में करना चाहिए दीपदान।
3 – नदी के किनारे या नदी में करना चाहिए दीपदान।
4 – दुर्गम स्थान में अथवा भूमि एवं धान्य के ऊपर करना चाहिए दीपदान।

कैसे करना चाहिए दीपदान…?

1- किसी मिट्टी के दिये में अथवा पीतल के पात्र में घी अथवा तेल डालकर उसे मंदिर में जलाकर देवता की ओर दीपक का मुख रखना चाहिए।
दीपों की संख्या और बत्तियां तिथि,पर्व,एवं समय के अनुसार और मनोकामना के अनुसार तय होती है।
2 – गेहूं के आटा से छोटा-छोटा सा दीपक बनाकर उसमें थोड़ा सा घी या तेल डालकर पतली सी रुई की बत्ती जलाकर उसे पीपल या वट के पत्ते पर रखकर नदी में प्रवाहित करना चाहिए।
3 – देव मंदिर में दीपक को सीधा भूमि पर नहीं रखना चाहिए उसे सप्तधान या चावल के उपर रखना चाहिए । शास्त्रानुसार दीपक को सीधा भूमि पर रखने से भूमि को आघात लगता है।

कब-कब करना चाहिए दीपदान…?

1- सभी स्नान पर्वों पर व्रत,पूजा, अनुष्ठान, एवं जन्मदिन के शुभ अवसर पर दीपदान करना चाहिए।
2 – नरकचतुर्दशी और यम द्वितीया के दिन भी दीपदान करना चाहिए ।
3 – दीपवली,अमावस्या और पूर्णिमा के दिन भी करना चाहिए दीपदान।
4 – दुर्गम एवं निर्जन स्थान एवं तीर्थ में तथा भूमि पर दीपदान करने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है तथा ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली समस्त बाधा कट जाती है।
5 – पद्मपुराण के उत्तरखंड में स्वयं महादेव कार्तिकेय को कार्तिक कृष्णपक्ष धनतेरस से यम द्वितीया तक पांच दिन दीपदान का विशेष महत्व बताते हैं।—
कृष्णपक्षे विशेषेन पुत्र पंचदिनानि च।
पूण्यानि तेषु यो दत्ते दीपं सोऽक्षयमाप्नुयात्।।
अर्थात्- कार्तिक कृष्णपक्ष में धनतेरस से भाई दूज तक 5 दिन बड़े पवित्र है। उनमें जो भी दान किया जाता है वह सब अक्षय और सम्पूर्ण कामनाओं को पूर्ण करने वाला होता है।

दीपदान करने से क्या होते हैं फायदे—

1- दीपदान करने से अकाल मृत्यु से रक्षा होती है।
2 – दीपदान करने से पितरों की सद्गति एवं तृप्ति होती है।
3 – दीपदान करने से लक्ष्मी माता और भगवान विष्णु को प्रसन्नता होती है एवं उनकी कृपा प्राप्त होती है।
4 – दीपदान करने से यमराज,शनि,राहु और केतु का नकारात्मक प्रभाव दूर होता है और नवग्रहों की प्रसन्नता प्राप्त होती है।
5 – दीपदान करने से समस्त प्रकार की बाधा,बला,गृहकलह और संकटों से रक्षा होती है।
6 – दीपदान करने से जीवन में अंधकार मिटकर उजाला आता है।
7 – शास्त्रानुसार दीपदान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
8 – किसी भी मांगलिक कार्य एवं पूजा के समय अथवा पहले दीपदान करने से कार्य की सिद्धि होती है।
9 – दीपदान करने से घर में धन समृद्धि बनी रहती है।
10 – कार्तिक माह में भगवान विष्णु या उनके अवतारों के समक्ष दीपदान करने से समस्त यज्ञों,तीर्थों एवं सभी प्रकार के दानों का फल प्राप्त होता है।
11 – दीपदान करने से जलते हुए दीपक में हानिकारक कीट पतंगों एवं विषाणु नष्ट हो जाते हैं जिससे वातावरण शुद्ध होता है।

आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”
(ज्योतिष वास्तु धर्मशास्त्र एवं वैदिक अनुष्ठानों के विशेषज्ञ)
संपर्क सूत्र – 09956629515
08318757871

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अभिषेक त्रिपाठी

Founder & Editor Mobile no. 9451307239 Email: Support@dainikmaharajganj.in

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