महराजगंज

भारत -नेपाल के तस्करों के सिंडीकेट ने उत्तर प्रदेश को भी दी नशे के बड़े बाजार की शक्ल फल-फूल रहा नशे का कारोबार

दैनिक महाराजगंज न्यूज़/ महाराजगंज पब्लिक न्यूज़ वेद प्रकाश दुबे प्रदेश विज्ञापन प्रभारी

उत्तर प्रदेश में नशे का कारोबार कितनी तेजी से बढ़ रहा है इसके गवाह तस्करों के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई के आंकड़े भी हैं। हालांकि जांच एजेंसियां जितना माल पकड़ती हैं उससे तीन गुना तक माल पकड़ में नहीं आता। कोरोना काल के दौरान भी यह कारोबार फलता-फूलता रहा देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में नशे के कारोबार का अलग अर्थशास्त्र भी है तस्करों के सिंडीकेट ने इसे बड़े बाजार की शक्ल दी है। युवाओं में नशे के बढ़ते चलन को जमीन बनाकर काले कारोबार की ऐसी इमारत खड़ी की गई है जिसे ढहाना जांच एजेंसियों के लिए बेहद मुश्किल होता जा रहा है। पूरब से पश्चिम तक प्रदेश के नौ शहर मादक पदार्थों के कारोबार का गढ़ बन चुके हैं जहां से अन्य जिलों में इनकी सप्लाई धड़ल्ले से होती है नेपाल और भूटान से लेकर उड़ीसा, छत्तीसगढ़ व अन्य राज्यों से गांजा, चरस, अफीम, हेरोइन व पोस्ता की बड़े पैमाने पर तस्करी उत्तर प्रदेश में की जा रही है। यहां से दिल्ली, हरियाणा पंजाब व अन्य राज्यों में सप्लाई का भी अलग चैनल है। नशे के कारोबार के आगरा, आजमगढ़, वाराणसी, लखनऊ, बाराबंकी, प्रयागराज, बरेली, अलीगढ़ व मीरजापुर बड़े केंद्र हैं

उत्तर प्रदेश में नशे का कारोबार कितनी तेजी से बढ़ रहा है, इसके गवाह तस्करों के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई के आंकड़े बताते हैं। हालांकि जांच एजेंसियां जितना माल पकड़ती हैं, उससे तीन गुना तक माल पकड़ में नहीं आता। कोरोना काल के दौरान भी यह कारोबार फलता-फूलता ही रहा। एसटीएफ की कार्रवाई पर निगाह डालें तो यह तस्वीर और साफ होती है। वर्ष 2019 में 143 किलो से अधिक चरस पकड़ी गई। इस वर्ष अब तक 136 किलो से अधिक चरस पकड़ी गई। पिछले पांच वर्षों में चरस की कुल बरामदगी 1363 किलो से अधिक रही है।

ऐसे ही वर्ष 2017 में 6265 किलो गांजा पकड़ा गया और वर्ष 2019 में 10688 किलो। इस वर्ष अब तक 16738 किलो से अधिक गांजा पकड़ा जा चुका है। साफ है कि मादक पदार्थों की सप्लाई लगातार बढ़ रही है। एसटीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार बाराबंकी के बाद बरेली स्मैक का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। बरेली व आसपास के जिलों में स्मैक बड़ी मात्रा में तैयार की जा रही है। डायरेक्ट्रेट आफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआइ) के एक अधिकारी के अनुसार नशे के कारोबार में मुनाफा कई गुना होता है। यही वजह है कि माल पकड़े जाने के बाद भी इसकी सप्लाई से जुड़े तस्करों के कारोबार पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।

भारत नेपाल बॉर्डर का सोनौली बढनी ठुठीबारी बॉर्डर चरस हिरोईन नशीली दवाओ का हब बन गया है

नेपाल की चरस भारी पैमाने मे तस्करो के जरिये सीमावर्ती जिलों में पहुंचाई जाती है।

नेपाल से कैबटि , पकड्डी , तस्करो के आईडिया से अधिकारीयो के दिमाग नही चल पाता कि कैसे कैसे रास्ते से चरस की सप्लाई होती है
यह बरामदगी
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने एसटीएफ के साथ मिलकर बीते करीब डेढ़ वर्ष में मादक पदार्थों की बड़े खेप पकड़ी है। इनमें 22787 किलो गांजा, 489 किलो अफीम, 3300 किलो पोस्ता, 44 किलो चरस व 2.86 किलो हेरोइन की बरामदगी की गई।
डीआरआइ का भी शिकंजा उत्तर प्रदेश में मादक पदार्थों के बढ़ते कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए डायरेक्ट्रेट आफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआइ) ने भी अपनी कार्रवाई तेज की है। डीआरआइ ने वर्ष 2019-20 में 13720 किलो गांजा व 68 किलो चरस पकड़ी थी। वहीं वर्ष 2020-21 में 23281 किलो गांजा व 4.493 किलो हेरोइन पकड़ी। यह सारी बरामदगी यह बताती है नशे का कारोबार कितना जोरों पर सीमावर्ती इलाकों से चल रहा है

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वेद प्रकाश दुबे

वेद प्रकाश दुबे प्रदेश विज्ञापन प्रभारी (लखनऊ) 7380436987

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