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सरकार की कमाई और खर्च का हिसाब रखती है ये संस्था, इसके डंडे से नहीं बच पाती कोई भी कंपनी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के कार्यालय में मंगलवार को पहले ऑडिट दिवस को संबोधित किया. प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कैग कार्यालय में सरदार वल्लभ भाई पटेल की एक प्रतिमा का अनावरण भी किया. इस कार्यक्रम में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक भी मौजूद रहे. ऑडिट दिवस का आयोजन एक संस्था के रूप में कैग की ऐतिहासिक शुरुआत के अवसर पर किया गया. आज इसी अवसर पर सीएगी के काम और अधिकार के बारे में जानेंगे.

भारतीय लेखा और लेखापरीक्षा विभाग (IA&AD) भारत के सबसे पुराने विभागों में एक है. इसी के तहत देश का कैग आता है. इस विभाग का गठन 1860 में हुआ था और तब एडमंड ड्रमंड को 16 नवंबर 1935 में देश का पहला कैग बनाया गया था. 1919 में इस विभाग को वैधानिक दर्ज दिया गया. आगे चलकर 1935 में इस विभाग के काम और अधिकार में संशोधन किया गया. 1950 में जब भारत का संविधान लागू हुआ तो ‘महालेखापरीक्षक’ का नाम बदलकर ‘भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक’ रखा गया.

क्या है कैग
भारत के महालेखापरीक्षक (CAG) एक संवैधानिक पदाधिकारी हैं जो संसद या राज्यों के विधानमंडलों से स्वतंत्र हैं. कैग भारत सरकार और राज्य सरकारों के विभागों और मंत्रालयों का ऑडिट करते हैं. केंद्रीय और राज्य सरकारों के तहत काम करने वाले विभागों, ऑटोनोमस संस्थाएं और सरकार से फंड पाने वाली संस्थाओं और विभागों की ऑडिटिंग का काम कैग के पास है. यूं कह सकते हैं कि कैग पब्लिक सेक्टर और उससे जुड़े विभागों के खर्च का ऑडिट करता है. कैग के काम में किसी अन्य एजेंसी को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है.

कैग की तरफ से अपनी रिपोर्ट जारी की जाती है जिसे केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रपति और प्रादेशिक स्तर पर राज्यपाल को भेजा जाता है. भारत में कैग का कार्यकाल 6 साल या कैग के पद पर बैठे अधिकारी की आयु 65 साल तक निर्धारित है. कैग को संसद की लोक लेखा समिति का ‘आंख और कान’ भी कहा जाता है. एक बार कैग की नियुक्ति हो जाए तो उसके वेतन और सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता. कैग को हटाने की प्रक्रिया बहुत ही जटिल है और यह वैसी ही होती है जैसे चीफ जस्टिस को हटाने के लिए अवमानना की कार्यवाही की जाती है.

कैग इन विभागों की ऑडिटिंग करता है
1-भारतीय रेल, रक्षा और डाक और टेलीकॉम सहित सभी केंद्रीय और राज्य सरकार के विभागों का खर्च
2-केंद्र और राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित लगभग 1500 सरकारी ऑद्योगिक काम जैसे सरकारी कंपनियां और निगम
3-केंद्र और राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित और मालिकाना हक वाले लगभग 400 नॉन कॉमर्शिलय ऑटोनोमस संस्थाएं
4-केंद्र से फंड लेने वाली संस्थाएं जैसे स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाएं जो विकास कार्यक्रमों को लागू करती हैं
कैग के ऑडिट में क्या होता है
कैग के ऑडिट में कई तरह के ट्रांजेक्शन शामिल हैं जो डेट, डिपॉजिट, रेमिटेंस, ट्रेडिंग और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े हो सकते हैं. प्रॉफिट और लॉस अकाउंट और राष्ट्रपति या राज्यपाल की ओर से दिए ऑर्डर से जुड़े बैलेंश शीट की जांच कर सकता है. रिसीट और स्टॉक अकाउंट का भी ऑडिट कर सकता है. कंपनी एक्ट के तहत कैग सरकारी कंपनियों के बुक अकाउंट का ऑडिट कर सकता है. अभी हाल में कैग ने सियालदह और हावड़ा से चलने वाली या वहां पहुंचने वाली कुछ ट्रेनों की ऑडिटिंग की थी और इसके लिए ऑडिटर्स की एक टीम बनाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक ऐतिहासिक आदेश में कहा था कि कैग जनरल उन प्राइवेट कंपनियों का भी ऑडिट कर सकता है जो सरकार से साथ रेवेन्यू-शेयर डील करती हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के कार्यालय में मंगलवार को पहले ऑडिट दिवस को संबोधित किया. प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कैग कार्यालय में सरदार वल्लभ भाई पटेल की एक प्रतिमा का अनावरण भी किया. इस कार्यक्रम में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक भी मौजूद रहे. ऑडिट दिवस का आयोजन एक संस्था के रूप में कैग की ऐतिहासिक शुरुआत के अवसर पर किया गया. आज इसी अवसर पर सीएगी के काम और अधिकार के बारे में जानेंगे.

भारतीय लेखा और लेखापरीक्षा विभाग (IA&AD) भारत के सबसे पुराने विभागों में एक है. इसी के तहत देश का कैग आता है. इस विभाग का गठन 1860 में हुआ था और तब एडमंड ड्रमंड को 16 नवंबर 1935 में देश का पहला कैग बनाया गया था. 1919 में इस विभाग को वैधानिक दर्ज दिया गया. आगे चलकर 1935 में इस विभाग के काम और अधिकार में संशोधन किया गया. 1950 में जब भारत का संविधान लागू हुआ तो ‘महालेखापरीक्षक’ का नाम बदलकर ‘भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक’ रखा गया.

क्या है कैग
भारत के महालेखापरीक्षक (CAG) एक संवैधानिक पदाधिकारी हैं जो संसद या राज्यों के विधानमंडलों से स्वतंत्र हैं. कैग भारत सरकार और राज्य सरकारों के विभागों और मंत्रालयों का ऑडिट करते हैं. केंद्रीय और राज्य सरकारों के तहत काम करने वाले विभागों, ऑटोनोमस संस्थाएं और सरकार से फंड पाने वाली संस्थाओं और विभागों की ऑडिटिंग का काम कैग के पास है. यूं कह सकते हैं कि कैग पब्लिक सेक्टर और उससे जुड़े विभागों के खर्च का ऑडिट करता है. कैग के काम में किसी अन्य एजेंसी को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है.

कैग की तरफ से अपनी रिपोर्ट जारी की जाती है जिसे केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रपति और प्रादेशिक स्तर पर राज्यपाल को भेजा जाता है. भारत में कैग का कार्यकाल 6 साल या कैग के पद पर बैठे अधिकारी की आयु 65 साल तक निर्धारित है. कैग को संसद की लोक लेखा समिति का ‘आंख और कान’ भी कहा जाता है. एक बार कैग की नियुक्ति हो जाए तो उसके वेतन और सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता. कैग को हटाने की प्रक्रिया बहुत ही जटिल है और यह वैसी ही होती है जैसे चीफ जस्टिस को हटाने के लिए अवमानना की कार्यवाही की जाती है.

कैग इन विभागों की ऑडिटिंग करता है
1-भारतीय रेल, रक्षा और डाक और टेलीकॉम सहित सभी केंद्रीय और राज्य सरकार के विभागों का खर्च
2-केंद्र और राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित लगभग 1500 सरकारी ऑद्योगिक काम जैसे सरकारी कंपनियां और निगम
3-केंद्र और राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित और मालिकाना हक वाले लगभग 400 नॉन कॉमर्शिलय ऑटोनोमस संस्थाएं
4-केंद्र से फंड लेने वाली संस्थाएं जैसे स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाएं जो विकास कार्यक्रमों को लागू करती हैं
कैग के ऑडिट में क्या होता है
कैग के ऑडिट में कई तरह के ट्रांजेक्शन शामिल हैं जो डेट, डिपॉजिट, रेमिटेंस, ट्रेडिंग और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े हो सकते हैं. प्रॉफिट और लॉस अकाउंट और राष्ट्रपति या राज्यपाल की ओर से दिए ऑर्डर से जुड़े बैलेंश शीट की जांच कर सकता है. रिसीट और स्टॉक अकाउंट का भी ऑडिट कर सकता है. कंपनी एक्ट के तहत कैग सरकारी कंपनियों के बुक अकाउंट का ऑडिट कर सकता है. अभी हाल में कैग ने सियालदह और हावड़ा से चलने वाली या वहां पहुंचने वाली कुछ ट्रेनों की ऑडिटिंग की थी और इसके लिए ऑडिटर्स की एक टीम बनाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक ऐतिहासिक आदेश में कहा था कि कैग जनरल उन प्राइवेट कंपनियों का भी ऑडिट कर सकता है जो सरकार से साथ रेवेन्यू-शेयर डील करती हैं

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