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देश

सदर विधानसभा सीट बीजेपी जयमंगल पर करेगी भरोसा या अर्चना चंद्रा पर लगाएगी दाव,बिन्द्रेश, निर्मेष या श्रीपत में से कौन जीतेगा सपा में टिकट

मनीष कुमार यादव
जिला संवाददाता महाराजगंज

महराजगंज :विधानसभा महराजगंज टिकट की दौड़ में भाजपा व सपा के कई कार्यकर्ता भी शामिल हैं। सदर विधानसभा में भाजपा के वर्तमान विधायक जयमंगल कन्नौजिया व पूर्व मंत्री चंद्रकिशोर की पत्नी अर्चना चंद्रा के बीच टिकट की रेस है।वहीं सपा में पूर्व विधायक श्रीपत आजाद, बिन्द्रेश कन्नौजिया व बसपा को छोड़ सपा में आए निर्मेष मंगल ने टिकट की दौड़ में फिनिश लाइन पार करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा अपने विधायक जयमंगल कन्नौजिया पर फिर से भरोसा जताते हुए उन्हें टिकट देती है या अर्चना चंद्रा पर दाव लगाती है या इन सबके उलट कोई चौंकाने वाली सियासी पारी खेलते हुए किसी तीसरे को पार्टी के टिकट पर सदर सीट के चुनावी मैदान में उतारती है। फिलहाल जनता के मूड के मुताबिक सियासत के इस खेल में भाजपा व सपा के बीच ही असली मुकाबला है। सदर सीट के मतदाताओं की यह खासियत है कि वह जिस जनप्रतिनिधि को भारी संख्या में वोट देकर विधायक चुनती है उसको अगले चुनाव में हराने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ती! पिछले दो दशक के चुनावी नतीजे पर गौर करें तो लगातार दो बार से अधिक कोई भी विधायक नहीं बन सका है।

मतदान के फाइनल मुकाबले के पहले भाजपा व सपा के संभावित उम्मीदवारों ने पार्टी टिकट के लिए जी-जान लगा दिया है। लाबिंग भी जारी है। टिकट के संघर्ष की बात बीजेपी से शुरू करें तो इसमें फिलहाल दो चेहरे मुख्य हैं। इसमें मौजूदा विधायक जयमंगल कन्नौजिया व अर्चना चंद्रा हैं। अंदरखाने से यह भी खबर आ रही है कि इस बार भाजपा जिलाध्यक्ष परदेशी रविदास भी चुनाव लड़ने के मूड में हैं। इसके अलावा नरेन्द्र खरवार, अमरनाथ पासवान, धर्मनाथ खरवार, अवधकिशोर भी भाजपा से टिकट मांगने वालों की सूची में हैं। चुनावी विश्लेषण करने वालों के मुताबिक अगर टिकट वितरण में बंसल खेमा की चली तो जयमंगल कन्नौजिया को टिकट मिल सकता है। क्योंकि जयमंगल कन्नौजिया सांसद व केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी के भी करीबी हैं। वहीं अर्चना चंद्रा सीएम योगी के भरोसेमंदो में शामिल हैं।यह कई बार महसूस किया जा चुका है कि सांसद व सीएम के बीच सबकुछ बहुत अच्छा नहीं है। चर्चा तो यह भी है कि एंटी इंकम्बेंसी की लहर को रोकने के लिए मौजूदा विधायक का टिकट भी काटा जा सकता है। पर सूत्रों के मुताबिक सर्वे में जयमंगल व अर्चना दोनों का रिपोर्ट कार्ड संतोषजनक नहीं है। ऐसे में बीजेपी किसको टिकट देगी इसको लेकर पार्टी के जिले स्तर के नेता भी स्पष्ट रूप से बताने को तैयार नहीं हैं।

सपा में टिकट को लेकर संघर्ष

भाजपा के मुकाबले में सपा खड़ी हुई है उसे देखते ही सदर सीट से टिकट के लिए पार्टी में मारामारी की स्थिति है। पार्टी की सियासी हलचल पर गौर करें तो पूर्व विधायक श्रीपति आजाद, युवा व भरोसेमंद कार्यकर्ता बिन्द्रेश कन्नौजिया व गीता रत्ना के बीच टिकट की होड़ है। सभी निगाहें पार्टी मुख्यालय पर टिकी हैं। सदर की सीट पर सपा कई बार काबिज हो चुकी है। पिछले चार चुनाव के नतीजों पर गौर करें तो चौदहवीं विधानसभा में पूर्व मंत्री चंद्रकिशोर चुनाव जीते थे। वहीं पन्द्रहवीं व सोलहवीं विधानसभा चुनाव में सपा के प्रत्याशी श्रीपति आजाद व सुदामा प्रसाद को जीत मिली जबकि सत्रहवीं विधानसभा में अपने विपक्षियों को पराजित कर जयमंगल कन्नौजिया ने जीत का ताज पहना था।इस बार सदर की सीट पर अपनी जीत को लेकर सपा पूरी तरह विश्वश्त है।वहीं पूर्व विधायक श्रीपति आजाद अपने टिकट को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं। बिन्द्रेश कन्नौजिया को पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा व समर्पण पर पूरा भरोसा है।वहीं बसपा से तीन बार दूसरे नंबर पर रहने वाले निर्मेष मंगल भी इस उम्मीद में हैं कि अगर सपा से टिकट मिला तो वह चुनाव जीत जाएंगे। क्योंकि पिछले पन्द्रह साल से वह सदर विधानसभा की सियासत में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके प्रति लोगों की सहानुभूति भी है। पर, यहां भी चर्चा है कि विशेष परिस्थिति को छोड़ सपा अनुसूचित वर्ग में धोबी, पासी के उम्मीदवार पर ही अपनी पसंद जताती है। इनके अलावा अन्य उपजाति के उम्मीदार यदा-कदा ही पार्टी का टिकट पाते हैं। इस नजरिए से टिकट की रेस का विश्लेषण करने वाले निर्मेष मंगल को लेकर बेहद आश्वस्त नहीं हैं कि उनको टिकट मिलेगा। फिलहाल टिकट को लेकर अटकलों का बाजार तभी थमेगा जब पार्टी आधिकारिक रूप से टिकट का ऐलान कर देगी। सपा समर्थक भाजपा के टिकट वितरण पर भी पैनी निगाह जमाए हैं। सपा के एक बड़े वर्ग की चाहत है कि टिकट जयमंगल कन्नौजिया को ही मिले। ऐसे समर्थकों का मानना है कि मौजूदा विधायक जयमंगल कन्नौजिया के खिलाफ एंटी इन्कम्बेंसी फैक्टर का लाभ सपा को मिल सकता है। सपाई जयमंगल की तुलना में अर्चना चंद्रा को अपना कड़ा प्रतिद्वंद्वी मान रहे हैं। पर, इस बार सदर सीट पर जीत को लेकर सपा खेमे में सौ फीसदी भरोसा है।सदर सीट से पिछले चार चुनाव का यह है जनादेश
सत्रहवीं विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी जयमंगल कन्नौजिया ने बसपा प्रत्याशी निर्मेष मंगल को पराजित किया था। इस चुनाव में जयमंगल को 1 लाख 25 हजार 154 वोट मिले थे। जबकि बसपा प्रत्याशी निर्मेष मंगल को 56 हजार 793 वोट मिला। कांग्रेस प्रत्याशी आलोक प्रसाद 50 हजार 217 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। सोलहवीं विधानसभा में इस सीट से कांग्रेस छोड़ सपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे सुदामा प्रसाद को जीत मिली थी। उनको 84 हजार 581 वोट मिला था।जबकि दूसरे नंबर पर बसपा प्रत्याशी निर्मेष मंगल थे। उनको 48 हजार 426 मत मिले थे। तीसरे नंबर पर भाजपा प्रत्याशी व पूर्व शिक्षामंत्री चंद्रकिशोर थे। उनको 45 हजार 301 वोट मिला था। पन्द्रहवीं विधानसभा चुनाव में महराजगंज सदर सुरक्षित सीट से सपा प्रत्याशी श्रीपति आजाद 38 हजार 529 वोट पाकर विधायक बने। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के निर्मेष मंगल ने 37 हजार 640 मत प्राप्त किया था। तीसरे नंबर पर भाजपा प्रत्याशी चंद्रकिशोर रहे थे। उनको 30 हजार 205 वोट मिले। चौदहवीं विधानसभा चुनाव में भाजपा के चंद्रकिशोर ने कांग्रेस के सुदामा प्रसाद को हराया था। समाजवादी पार्टी के चंद्रेश पासवान तीसरे व बसपा प्रत्याशी रामप्रीत जख्मी चौथे स्थान पर रहे। इस चुनाव में भाजपा के चंद्रकिशोर को 42 हजार 994 वोट मिले। वह 8 हजार 515 वोटों से विधानसभा का चुनाव जीतने में सफल रहे थे।
बसपा व कांग्रेस में तीसरे व चौथे नंबर की लड़ाई का अनुमान ।

महाराजगंज सदर सीट से बसपा कभी खाता नहीं खोल पाई है। इस बार के विधानसभा चुनाव में बसपा की सक्रियता भी उतनी आक्रामक नहीं दिख रही है जो उसकी पहचान है। इस बार अमरनाथ पासवान बसपा की दावेदारी कर रहे हैं, लेकिन सियासी चौपालों पर जो अटकलबाजी हो रही है उसे देखते हुए यह कहा जा रहा है कि चुनावी रेस में बसपा जीत की फिनिश लाइन तक नहीं पहुंच पाएगी। कांग्रेस के आलोक प्रसाद सत्रहवीं विधानसभा के चुनाव में तीसरे नंबर पर थे। उनको 20.31 फीसदी यानी 50 हजार 217 वोट मिले थे। जबकि चुनाव जीतने वाले भाजपा प्रत्याशी जयमंगल कन्नौजिया को 50.63 फीसदी यानी 1 लाख 25 हजार 154 मत प्राप्त करने में सफल रहे। चुनाव जीतने वाले प्रत्याशी और आलोक के बीच 74 हजार 936 वोटों का फासला था। इस बार भी आलोक प्रसाद को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार घोषित किया है। पर, कांग्रेस को जीत के लिए जिस माहौल की दरकार है वह दूर-दूर तक कहीं नजर नहीं आ रहा है। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि बसपा व कांग्रेस के बीच तीसरे व चौथे नंबर की लड़ाई रहेगी। असली तस्वीर मतगणना के बाद ही सामने आएगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता की अदालत का फैसला किसके पक्ष में जाएगा।

मनीष कुमार यादव
जिला संवाददाता महाराजगंज

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मनीष यादव

सम्वाददाता - चौक बाजार

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