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कोरोना की वजह से किसानों को पड़ रही है दोहरी मार, पहले मानसून ने रुलाया, अब धान की कटाई 2400 सौ रुपए प्रति एकड़

अन्नदाता का हाल बेहाल- कंबाइन का रैपर काट रहा सिर्फ धान की बाल-कैसे कटेगा किसानो के खेत का अवशेष , विभागीय अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान

महराजगंज जनपद के बेबस किसान भाई दोहरी मार झेल रहे है। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण किसानों की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो चुकी हैं। नौबत यह हैं। कि किसान भाइयों को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैं। आप को बताते चलें कि प्रदेश सरकार पराली ना जलाने के कड़े निर्देश जारी किया गया है। वही कम्पाइन मालिकों द्वारा खड़े धान की कटाई करीब 2400 सौ रुपए प्रति एकड़ कर दिया गया है। जबकि पिछले वर्ष कटाई के दाम 1200 सौ रुपए प्रति एकड़ थे। 1200 सौ रुपए दाम बढ़ने से किसान भाइयों की कमर तोड़ दी हैं। दूसरी समस्या कम्पाइन मालिकों द्वारा खड़े धान की कटाई के बाद अवशेष करीब दो फीट ऊपर से काटा जा रहा है। ऐसे में खेत की जुताई व गेहूं की बुआई कैसे किया जाए। किसान भाइयों की मांग है। कि कम्पाइन मालिकों द्वारा बढ़ाए गए। दामों को नियंत्रण किया जाए। और खड़े धान की अवशेषों को करीब एक फीट ऊपर से काटा जाए। जिससे जुताई व गेहूं की बुआई में कोई समस्या ना उत्पन्न ना हो। कम्पाइन मालिकों पर लगाम कसने के साथ साथ खड़े धान की कटाई के दामों पर भी नियंत्रण किया जाए। किसानों में छोटेलाल, रामजीत प्रसाद, गजयन यादव, रामतिलक, अतुल तिवारी, प्रदीप यादव, अलगू, अर्जुन, हेमचंद, बुद्धू यादव, कोदई यादव, अशोक, गिरिजेश पाल, रामसेवक जयसवाल, पप्पू साहनी, झिनकू यादव, अजय, रामवृक्ष, सुरेश साहनी, समेत दर्जनों किसान भाइयों ने आवाज उठाई।

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