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पेड़ो की कटाई से पड़ रहा पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव विभागीय उदासीनता के कारण जंगल हो रहे विरान

लक्ष्मीपुर रेंज के अचलगढ बीट के बनचौकी बनकटवा के समीप जंगल के सागौन पेड़ के कटान का सात बोटा लकड़ी कोटकम्हरिया के टोला तिवारीपुर के बाग में मिला है ।जिसे बनबिभाग ने कब्जे में ले लिया है ।जब की दो सागौन पेड़ का बोटा गायब है । सिर्फ मौके पर बूट पड़ा है
क्षेत्र के अचलगढ बीट के बनचौकी बनकटवा के जंगल के सागौन पेड़ का सात बोटा लकड़ी कोटकम्हरिया के टोला तिवारीपुर के एक बाग में शनिवार को सुबह में ग्रामीणों ने देख लिया ।जिसकी सूचना बनक्षेत्राधिकारी लक्ष्मीपुर को दिया ।सूचना मिलने के बाद बनक्रर्मियो ने कब्जा में लेकर बन अधिनियम के तहत कार्रवाई करना शुरू कर दिया है।
जब की बनचौकी बनकटवा से लगभग 500 सौ मीटर के दूरी पर पश्चिम तरफ दो पेड़ सागौन के मोटे पेड़ और कटे हैं ।बोटा गायब है ।सिर्फ बूट पड़ा है ।जिसे बन विभाग के क्रर्मिको के द्वारा बनवाया जा रहा था ।कटान को छिपाने के लिए । लेकिन बूट के तरफ स्थानीय लोगों को आते देख स्थानीय बनकर्मी आदमी के साथ भाग कर निकल गए ।
इस संबध में बनक्षेत्राधिकारी लक्ष्मीपुर बिजय शंकर द्विवेदी का कहना है कि लकड़ी को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है ।जिस दो पेड़ का बोटा गायब है । उसमें संलिप्त लोगों का पता लगाकर कर दोषियों पर आवश्यक कार्रवाई होगा । स्वस्थ्य जीवन के लिए पर्यावरण का स्वच्छ रहना अनिवार्य है। इसके लिए हमारे आसपास पेड़ पौधों की अधिकता बेहद जरुरी है। वृक्षों की अंधाधूंध कटाई से पर्यावरण पर इसका बुरा असर पड़ने की संभावना तीव्र हो गयी है। जहां एक ओर हरियाली योजना के तहत सरकार द्वारा चंद सिक्कों के खातिर वृक्षों को काटकर हरियाली खत्म की जा रही है। चंद लोग अपनी निजी आर्थिक लाभ के कारण हरे भरे पौधों को भी काटने से बाज नहीं आ रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों के लापरवाही के कारण जिले में वृक्षों की कटाई बदस्तूर जारी है। अधिकारियों द्वारा किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं किये जाने से ऐसे लोगों का हौसला बुलंद होता जा रहा है। पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ अभियान के तहत सरकार करोड़ों रुपये पौधे लगाने में खर्च कर रही है। लेकिन वर्षो पुराने लगे पेड़ों की कटाई सरकार के सपनों को चकनाचूर कर दिया है। अगर समय रहते पेड़ों की कटाई पर रोक नहीं लगायी गयी तो वनों के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो जाएगा। वृक्षों के इस अंधाधूंध कटाई से जहां एक ओर वातावरण गर्म हो रहा है वहीं प्रदूषण के कारण लोगों को श्वास, आंख,फेफड़ा एंव अन्य बीमारियों से ग्रसित होना पड़ रहा है।

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