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एक अंधे सूरदास ने एहसास, दिलाया डॉ. जावेद अख्तर के साथ अन्य लोगो को भी माँ का दर्द।

जिला- महराजगंज के एक असमन छपरा गाँव मे रहता है बेघर सूरदास, अंधा जिसके दिल मे एक माँ के न रहने का दर्द को लेकर जिता है

आप को बताते चले कि सूरदास ,अंधे की ज़िंदगी मे माँ के ना रहने का गम कैसे सता रही है । संवाद सूत्र के अनुसार मालूम चला कि इस अंधे, सूरदास की माँ कुछ साल पहले इस दुनिया से गुज़र गयी जिसको लेकर आज भी ये सूरदास महसूस करता है इसकी माँ के गुजरने के बाद इसके पिता ने फिर से दूसरी शादी कर ली कुछ दिन गुज़रने के बाद वो भी सौतेली माँ छोड़ कर चली गयी । आज इस सूरदास की ज़िंदगी मे बस अकेलापन साथ रह गया है इस अकेलेपन के साथ जीता है और अपनी ज़िंदगी किसी तरीके से काट रहा है। हालांकि इसके घर मे जो लोग भी थे जैसे, भाई, बहन, पिता,अंधे होने के नाते सब इसको अकेले छोड़ दिये और ये सूरदास , अंधे होने के नाते इसको कोई अपनी ज़िंदगी मे शामिल भी नही किया।

डॉ. जावेद अख्तर

आज अपने पेट को पालने के लिए इधर , उधर जाकर मांग कर खाता रहता है और पेट को भरता है। जब इसे कोई खाने को भी नही मिलता तब ये अपने माँ को याद करता है , महसुस करता है जो इस दुनिया मे नही है । जब कोई बोलता है गाना गा कर सुनाओ फिर पैसे रुपये खाने को देंगे तब वही गाना गा कर लोगो को सुनाता है जिस में हर कड़ी के अंदर एक माँ के दर्द को ज़ाहिर किया है । भोजपुरी गीत गाँव, गाँव में जा कर सुनाता है फिर लोग इसको रुपये पैसे, खाने को देते है । आप सभी से यही एक आरज़ू है कि आज जो हम अपने माँ के साथ गलती कर रहे हैं। शायद ख़ुदा, भगवान हमे माफ ना करे। जिसकी माँ है वो लोग कम से कम अपनी माँ की सेवा करके जन्नत , स्वर्ग हासिल कर सकते हैं। क्योंकि माँ के क़दमो के नीचे जन्नत है स्वर्ग, है माँ एक ऐसी प्रोपर्टीज है जो खोने के बाद कभी लाखो करोड़ो से खरीदा नही जा सकता । ऐसा दुबारा कभी ज़िंदगी मे मौका नही मिलेगा माँ के सेवा करने के लिए आज इस सुरदास, अंधे, ने हमे याद दिलाया महसूस करा दिया कि माँ से बढ़ कर कोई नही । ये है एक सुरदास की ज़िंदगी की कहानी

     लेखक

डॉ. जावेद अख्तर

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Javed akhtar

State head Uttar Pradesh 9450167973

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