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कोविड-19सतना

कोरोना से अब तक जान गंवा चुके हैं 300 से ज्यादा पत्रकार यदुवंशी ननकू यादव राष्ट्रीय जन सेवक पत्रकार संघ

दूसरी लहर ने बरपाया ज्यादा कहर

कोरोना की पहली और दूसरी लहर में ग्राउंड पर जाकर रिपोर्टिंग कर रहे रिपोर्टरों और लगातार ऑफिस जा रहे पत्रकारों को न तो फ्रंट लाइन वर्कर माना गया और न ही उनको वैक्सीन में प्राथमिकता मिली. परिणाम ये हुआ कि कई नामी गिरामी पत्रकारों सहित अलग-अलग राज्यों में 300 से ज्यादा मीडियाकर्मी कोरोना की चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं.

यूपी में 37 पत्रकारों की कोरोना से मौत हुई
मई में हर रोज चार पत्रकारों का निधन हुआ है
युवा पत्रकार सबसे ज्यादा कोरोना के शिकार बने
कोरोना वायरस के कहर से पिछले साल बड़ी संख्या में फ्रंट लाइन वर्कर जैसे डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मी, पुलिसकर्मियों को जान गंवानी पड़ी. यही वजह रही कि देश में जब वैक्सीन लगनी शुरू हुई तो सबसे पहले इन्हें ही प्राथमिकता दी गई. इसका अच्छा असर भी हुआ. कोरोना की दूसरी लहर में जान गंवाने वालों में इन फ्रंटलाइन वर्कर्स की संख्या अपेक्षाकृत कम रही. हालांकि मीडियाकर्मी इतने भाग्यशाली नहीं रहे.

कोरोना की पहली और दूसरी लहर में ग्राउंड पर जाकर रिपोर्टिंग कर रहे रिपोर्टरों और लगातार ऑफिस जा रहे पत्रकारों को न तो फ्रंट लाइन वर्कर माना गया और न ही उनको वैक्सीन में प्राथमिकता मिली. परिणाम ये हुआ कि कई नामी गिरामी पत्रकारों सहित अलग-अलग राज्यों में 300 से ज्यादा मीडियाकर्मी कोरोना की चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं. इसे त्रासदी ही कहेंगे कि अप्रैल के महीने में हर रोज औसतन तीन पत्रकारों ने कोरोना के चलते दम तोड़ा. मई में यह औसत बढ़कर हर रोज चार का हो गया.

*कोरोना महामारी में पत्रकार कोरोना की दूसरी लहर में*

देश ने कई वरिष्ठ पत्रकारों को खो दिया. जिले, कस्बे, गांवों में काम कर रहे तमाम पत्रकार भी इस जानलेवा वायरस के सामने हार गए. दिल्ली आधारित इंस्टीट्यूट ऑफ परसेप्शन स्टडीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2020 से 16 मई 2021 तक कोरोना संक्रमण से कुल 238 पत्रकारों की मौत हो चुकी है.

*मई के महीने में हर रोज चार पत्रकारों ने दम तोड़ा*

रिपोर्ट बताती है कि कोरोना की पहली लहर में अप्रैल 2020 से 31 दिसंबर 2020 तक 56 पत्रकारों की मौत हुई *हमारे मध्य प्रदेश के सतना जिला  मैहर तहसील  के  न्यूज़ स्टार के ब्यूरो चीफ  सैयद अली  भी करोना के चपेट में आ गए  जिनका  इलाज के दौरान  मौत हो गई*
लेकिन दूसरी लहर ज्यादा भयावह साबित हुई. 1 अप्रैल 2021 से 16 मई की बीच 171 पत्रकारों ने दम तोड़ दिया. शेष 11 पत्रकारों का निधन जनवरी से अप्रैल के बीच हुआ.

इंस्टीट्यूट के रिकॉर्ड में 82 पत्रकारों के नाम और हैं, जिनका वेरीफिकेशन नहीं हो सका है. नेटवर्क ऑफ वुमन इन मीडिया, इंडिया के मुताबिक भी करीब 300 पत्रकारों की मौत कोरोना संक्रमण के चलते हुई है. इसका एक गूगल डॉक्यूमेंट ट्विटर पर खूब शेयर हो रहा है.

कोरोना से 300 से ज्यादा पत्रकारों का निधन हुआ   इंस्टीट्यूट ऑफ परसेप्शन स्टडीज की रिपोर्ट में उन सभी पत्रकारों को शामिल किया गया है जो फील्ड में खबर एकत्रित करते हुए अथवा दफ्तरों में काम करते हुए कोरोना संक्रमित हुए और उनकी जान चली गई. इनमें मीडिया संस्थानों के रिपोर्टर से लेकर, स्ट्रिंगर, फ्रीलांसर, फोटो जर्नलिस्ट और सिटिजन जर्नलिस्ट तक शामिल हैं.             

मुकेश श्रीवास्तव सतना

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