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“मेरे पति ने कोई कमी नहीं रखी थी” अम्मा!

मां एक ऐसा शब्द है जिसे सुनकर लोगों के दिलों में प्यार उमड़ आता है। वहीं इस शब्द का कुछ लोगों ने मजाक बना दिया है। इन लोगों ने मां की ममता को अपने मतलब के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। आए दिन खबर आती है कि बेटा या बहू ने अपने माता-पिता को वृद्धाश्रम भेज दिया या फिर घर से बाहर निकाल दिया।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा में रहने वाली एक वृद्ध महिला को उसके बेटे- बहु ने घर से बाहर निकाल दिया है। जब वृद्ध महिला से पूछा गया कि वह अपने परिवार को छोड़कर यहां बाहर क्यों रहती हैं तो वृद्ध महिला ने बताया कि मुझे मेरे घर से बाहर निकाल दिया गया है। वृद्ध महिला ने बताया कि मेरी सारी जमीन और संपत्ति को मेरे बेटे- बहु ने बेच दिया है । वृद्ध महिला ने बताया कि,” मेरे पति के मरने के बाद सारी जमीन और संपत्ति को बेटे- बहु ने बेच दिया गया। मेरे पति ने घर में कोई कमी नहीं रखी थी। उन्होंने पानी का नल, अंग्रेजी शौचालय एवं बिजली भी लगवा दिए थे। मेरे पति के मरने के बाद मेरे सौतेले बेटे और बहू ने मेरी सारी संपत्ति को बेच दिया और मुझे घर से बाहर निकाल दिया। इसलिए मुझे इस आज इस प्रकार खुले मैदान में जीवन जीना पड़ रहा है। “

उन्होंने बताया कि,” इसी फील्ड के पास एक गार्ड का रूम है जो कि खाली था। उसी को साफ कर के मैं वहां रहती हूं।” वृद्ध महिला ने बताया कि उनकी शादी 15 वर्ष की आयु में ही हो गई थी। वह अपने पति की दूसरी पत्नी थी। जिनसे उन्हें उनकी पहली पत्नी का एक बेटा था। उन्होंने बताया कि उनके बच्चे ने जन्म लेते ही दम तोड़ दिया था। वह अपने सौतेले बच्चों को आज भी फोन करती हैं कि वह उन्हें आ के यहां से ले जाएं लेकिन वह नहीं आते हैं।

मयंक जोशी बना मसीहा

वृद्ध लोगों को जहां उनके अपने परिवार वाले उन्हें उनके घर से बाहर निकाल देते हैं। वहीं गैरों ने उनके लिए अपने हाथ उठाए हैं। वृद्ध लोगों की मदद करने के लिए बहुत से लोग सामने आ रहे हैं। उनमें से एक मयंक जोशी भी हैं ।जो कि अभी छात्र हैं। उन्होंने इससे पहले भी एक वृद्ध पुरुष की सहायता की थी। अब इस वृद्ध महिला की सहायता कर रहे हैं। मयंक इन्हें प्यार से अम्मा बुलाते हैं। उन्होंने अम्मा की सहायता के लिए चैरिटी फंड से बात भी की है। ताकि अम्मा को कोई भी दिक्कत ना हो। उन्होंने अम्मा के लिए एक रूम भी देख लिया है। जिसका किराया उस चैरिटी फंड के द्वारा ही दिया जाएगा। अम्मा के रहने से लेकर खाने-पीने तक का खर्चा चैरिटी फंड के द्वारा ही देखा जाएगा। लेकिन अम्मा उस जगह को छोड़कर अभी भी जाना नहीं चाहती। उन्हें डर है कि अगर उन्हें वहां से भी निकाल दिया गया तो वह कहां रहेंगी।

Source:- writer Priyanka singh

अभिषेक त्रिपाठी

Founder & Editor Mobile no. 9451307239 Email: Support@dainikmaharajganj.in

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