WhatsApp Image 2022-08-17 at 6.06.27 AM
WhatsApp Image 2022-08-17 at 6.06.28 AM (1)
WhatsApp Image 2022-08-17 at 6.06.28 AM
WhatsApp Image 2022-08-17 at 6.06.29 AM
WhatsApp Image 2022-08-17 at 6.06.30 AM
WhatsApp Image 2022-08-17 at 6.06.31 AM
WhatsApp Image 2022-08-29 at 11.34.36 AM (1)
WhatsApp Image 2022-08-29 at 11.34.36 AM
WhatsApp Image 2022-08-29 at 11.34.35 AM
WhatsApp Image 2022-08-29 at 11.34.35 AM
IMG-20220819-WA0003
IMG-20220830-WA0000
महराजगंज

धूम-धाम से मनाया गया सरदार वल्लभ भाई पटेल की 146वीं जयंती, विधायक प्रेमसागर पटेल ने बताया कि-अखंड भारत के निर्माण में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता

दैनिक महराजगंज न्यूज़

महराजगंज। निचलौल ब्लॉक के झुलनीपुर में आज सरदार वल्लभ भाई पटेल की 146 वा जयंती समारोह के कार्यक्रम में क्षेत्रिय विधायक प्रेमसागर पटेल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। और उन्होंने बताया कि सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के खेड़ा जिले में हुआ था।उन्होंने अपनी अंतिम सांस 15 दिसंबर 1950 को मुंबई में ली।लौहपुरुष’ सरदार वल्लभभाई पटेल स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देशी रियासतों का एकीकरण कर अखंड भारत के निर्माण में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। गुजरात में नर्मदा के सरदार सरोवर बांध के सामने सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची लौह प्रतिमा का निर्माण किया गया है।सरदार पटेल अन्याय नहीं सहन कर पाते थे। अन्याय का विरोध करने की शुरुआत उन्होंने स्कूली दिनों से ही कर दी थी। नडियाद में उनके स्‍कूल के अध्यापक पुस्तकों का व्यापार करते थे और छात्रों को बाध्य करते थे कि पुस्तकें बाहर से न खरीदकर उन्हीं से खरीदें। वल्लभभाई ने इसका विरोध किया और छात्रों को अध्यापकों से पुस्तकें न खरीदने के लिए प्रेरित किया। परिणामस्वरूप अध्यापकों और विद्यार्थियों में संघर्ष छिड़ गया। 5-6 दिन स्‍कूल बंद रहा। अंत में जीत सरदार की हुई। अध्यापकों की ओर से पुस्तकें बेचने की प्रथा बंद हुई।सरदार पटेल को अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने में काफी समय लगा। उन्होंने 22 साल की उम्र में 10वीं की परीक्षा पास की। सरदार पटेल का सपना वकील बनने का था और अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उन्हें इंग्लैंड जाना था, लेकि‍न उनके पास इतने भी आर्थिक साधन नहीं थे कि वे एक भारतीय महाविद्यालय में प्रवेश ले सकें। उन दिनों एक उम्मीदवार व्यक्तिगत रूप से पढ़ाई कर वकालत की परीक्षा में बैठ सकते थे। ऐसे में सरदार पटेल ने अपने एक परिचित वकील से पुस्तकें उधार लीं और घर पर पढ़ाई शुरू कर दिया।

इस दौरानअम्बरीष तिवारी,  प्रधान प्रतिनिधि अभय शंकर सिंह उर्फ बबलू सिंह, ग्राम प्रधान धर्मेंद्र पटेल,अभयमित्र पाण्डेय , विजय तिवारी,विपिन सिंह, पूर्व प्रधान सुरेंद्र कुशवाहा, राजमन पटेल,विनय पटेल, अशोक पटेल अविनाश पटेल ,सुनील पटेल, आशीष पटेल, आदि भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

दिनेश रौनियार

उप सम्पादक 9794946039

Related Articles

Back to top button