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धार्मिक

शान्ति के साथ मनाया गया मुस्लिम समाज द्वारा शबे ए बरात का त्योहार

सिसवा ब्लाक के अंतर्गत ग्राम सभा रुद्रापुर में मनाया गया शांतिपूर्वक शबे ए बरात का त्योहार ।और मांगी गई मुल्क में अमन व शांति की दुआ

दैनिक महराजगंज न्यूज़

सिसवा ब्लाक के अंतर्गत ग्राम सभा रुद्रापुर मे शान्ति से मनाया गया शबे ए बरात का त्यौहार आप को बताते चले के आज ग्राम सभा रुद्रापुर मे शांति से मनाया गया शबे ए बरात का त्योहार गांव के मुस्लिम समुदाय के लोग ईदगाह में में जमां हो कर रात जग कर ख़ुदा की इबादत किये बाद नमाज़ ईशा अपने कब्रस्तान में बाकायदा टेंट का व्यवस्था कर के अपने महफ़िल को सजाया सर्व प्रथम श्री हाफिज अब्दुस्सलाम के द्वारा कुरान शरीफ व नाते पाक पढ़ा गया जिसमे मुस्लिम समुदाय के लोग बैठ कर सुने वही मौलाना अब्बास अली नूरी ने अपनी तक़रीर में शबे ए बरात का जिक्र करते हुए शबे ए बरात त्यौहार का मतलब बताया और मुस्लिम समाज के लोग रात जग कर सुनते रहे।
शब-ए-बारात की इस्लाम में काफी अहम मान्यता है
मुस्लिम समुदाय के लोग रात भर इबादत करते हैं
शब-ए-बारात मुस्लिम समुदाय के प्रमुख त्योहारों में से एक है. इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, शब-ए-बारात शाबान महीने की 15वीं तारीख की रात को मनाई जाती है. जो इस साल 18 मार्च 2022 को सूर्यास्त से शुरू होकर 19 मार्च सुबह तक मनाई जाएगी.
शब-ए-बारात इस्लामिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण होती है. मुस्लिम समुदाय के लोग रात भर जागकर इबादत करते हैं और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं. शब-ए-बारात मुस्लिम समुदाय के लिए इबादत, फजीलत, रहमत और मगफिरत की रात मानी जाती है. यानी इस रात में लोग इबादत करते हैं और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं.
शब-ए-बारात का अर्थ कुछ इस प्रकार है. शब यानी रात और बारात का मतलब होता है बरी होना. शब-ए-बारात के दिन इस दुनिया को छोड़कर जा चुके लोगों की कब्रों पर उनके प्रियजनों द्वारा रोशनी की जाती है और दुआ मांगी जाती है. इस दिन अल्लाह से सच्चे मन से अपने गुनाहों की माफी मांगने से जन्नत में जगह मिलती है.
मुस्लिम समुदाय के लोग शब-ए-बारात के अगले दिन रोजा रखते हैं. यह रोजा फर्ज नहीं है बल्कि नफिल रोजा कहा जाता है. यानी रमजान के रोजों की तरह ये रोजा जरूरी नहीं होता है, कोई ये रोजा रखे तो इसका पुण्य तो मिलता है, लेकिन न रखे तो इसका गुनाह नहीं होता.
हालांकि, मुसलमानों में कुछ का मत है कि शब-ए-बारात पर एक नहीं बल्कि दो रोजे रखने चाहिए. पहला शब-ए-बारात के दिन और दूसरा अगले दिन।
मुस्लिम समुदाय के लोग शब-ए-बारात के दिन अपने घरों को सजाते हैं. घरों में इस दिन पकवान आदि बनाए जाते हैं और गरीबों में भी बांटे जाते हैं.
उपस्थित लोगों में जनाब मास्टर निजामुद्दीन,मास्टर कमरुद्दीन कमेटी के सदर जनाब मुख्तार प्रबंधक हाजी रियासत अली मोहम्मद शमीम आदि की उपस्थिति खास रही

Javed akhtar

State head Uttar Pradesh 9450167973

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