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लखनऊ

प्रापर्टी डीलर की हत्या का तुल पकड़ता जा रहा है : सी एम ने जांच की दो कमेटी गठन के दिये निर्देश

गोरखपुर : उतर प्रदेश के सी एम का सहर गोरखपुर में प्रॉपर्टी डीलर मनीष गुप्ता की हत्या का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। मनीष की पत्नी मीनाक्षी ने पुलिस पर कई तरह के आरोप लगाए हैं। जिसके मुतबाबिक, पुलिस की मारपीट से ही मनीष की मौत हुई है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर कड़ा रुख जताते हुए कहा कि दोषी कोई भी हो छोड़ा नहीं जाएगा। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के अधीन 2 कमेटियां बनाने के निर्देश दिए हैं। जो कि पूरे मामले की जांच करेंगी।
इसी बीच एक हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है। जिसमें पुलिस के बड़े अधिकारी पीड़िता को धमकी भरे अंदाज में केस दर्ज न कराने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन पीड़िता का कहना है कि वह इंसाफ लेकर रहेगी। जानिए क्या है पूरा मामला क्यों मौत के बदले मौत मांग रही पीड़िता…

रात मे बारह बजे चैकिंग मे गये थे थाना प्रभारी( रामगढ़ताल) अन्य पांच लोगों के साथ। इंस्पेक्टर जगत नरायण सिंह उप नाम नगद नरायण सिंह से फेमस हैं ।
पूरा पुलिस महकमा जानता है।पकड़ अच्छी थी और सिंह टाइटिल सोने पर सुहागा था। थाना क्षेत्र के सभी होटलो मे मुखबीर फिट हैं। मोटा आसामी आने की भनक लगते ही चैकिंग के नाम पर उगाही का धंधा फलफूल रहा था। इसी क्रम में चैकिंग हुई। कुछ मिला नहीं और रकम भी नसीब नहीं हुई क्योंकि वे लोग किसी डील के लिये नहीं आये थे ।अभी सिर्फ घूमना और काम के स्कोप का आइडिया लेने आये थे इस लिये माल ताल मिला नहीं और आदमी गलत नहीं थे तो बातचीत मे भी वो दबे नहीं।
अगर कोई लेडिज होती इनके साथ तब तो कोई घटना ही नहीं होती।लेकिन पुलिस की उम्मीदें टूट गयी और मनीष गुप्ता ने ए पुछ लिया कि “तसल्ली हुई और अपने किसी बीजेपी नेता को फोन भी कर दिया।
दोनों हरकते पुलिस को नागवार गुजरी और बाकियों की तो नारमल पीटाई हुई और कमरे से बाहर भी कर दिया लेकिन मनीष गुप्ता को ढंग से सबक सिखा दिया।थोड़ा शराब का नशा और पहली नींद से जागने पर मनीष में वो फूर्ती नहीं थी कि बच पाता। डंडे से ठोकने के बाद “तसल्ली हुई ” पूछने पर रायफल के बट से नाक पर सीधा वार और गिरते ही सिर पर वार भारी पड़ गया और वो कोमा मे चला गया लेकिन ये बेवकूफ उसे रायफल के बैरल से कोंच कर होश मे लाना चाह रहे थे लेकिन वह निढाल हो चुका था।पुलिस समझदार होती है हालत देखकर पुलिस सकते मे आ गई और बगल के हास्पीटल मे ले गई।मालूम था कि कहानी खत्म हो गई है इसलिए वहां मनीष के किसी दोस्त को नहीं ले जाया गया।डाक्टरों ने पिछा छुड़ाया रेफर कर दिया मेडिकल कालेज क्योंकि मर चुका था मनीष।अगर जिंदा होता तो डाक्टर जिला अस्पताल भेजता । इन लोगों ने डेडबाडी को गाड़ी मे डाल कर थाने ले गये अपनी वर्दी बदलने क्योंकि वर्दी पर भी सबके खून लगा था अब इंस्पेक्टर जी स्टोरी बना चुके थे सीढ़ी से या कमरे मे गिरने नशा करने ,मीर्गी आने और चोट लगने व इलाज के दौरान मरने का।(वही स्टोरी एस एस पी ने सुबह मीडिया को सुनाया।)

लेकिन सोचने वाली बात यह भी है कि

थाना से मेडिकल कालेज जाने मे पौने दो घंटा लगने का कारण यही था वर्दी बदलना नेम प्लेट हटाना, सीसीटीवी सेट कराना, कमरे की साफ सफाई कराना।दो बजे मेडिकल पहुंचे जबकि मनीष के दोस्त एक/डेढ़ घंटा पहले पहुंच गये थे।वहां डाक्टरों को कुछ करने के लिये बचा ही नहीं था brought dead लिख दिया लेकिन पुलिस मनाती रही कि इलाज के दौरान मृत्यु बताइये।इस बीच होटल के एक कर्मचारी का आडियो वायरल हो गया।वो किसी खास से बता रहा था कि पुलिस ने ठोक दिया एक गेस्ट को कमरे मे तो कहीं मै भी तो नही फंसूंगा ।
बस यहां से कहानी मे ट्वीस्ट आना शूरू हो गया। मनीष के घर वालो को रात को ही सब कुछ उसके दोस्तो ने बता दिया।
तुरंत लोग यहां के लिये रवाना हुये।मामला तूल पकड़ता देखकर एस एस पी जी ने फिर बयान दिया दोपहर को कि छ पुलिस वाले निलंबित और जांच एसपी नार्थ को दी गयी।इसके बाद परिजनो को पटाने समझाने का सिलसिला शुरू हुआ और तब तक विपक्षी पार्टियां भी कूद गयी और कुछ आडियो वीडियो भी वायरल हुये जिसमे साफ पता लग रहा था कि इंस्पेक्टर नगद नरायण सिंह को हर हाल मे बचाया जा रहा था।लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी ठीक से मैनेज नहीं हो पाई।फेमली का धरना हो गया।विपक्षी हवा देने को तैयार हो रहे थे।एल आइ यू ने रिपोर्ट दे दिया कि कहीं देर न हो जाये और मुख्यमंत्री जी की मामले मे इंट्री कराई गयी वरना पोस्टमार्टम के बाद बाडी ही नही ले रही थी फेमली।इसके बाद डीएम और एस एस पी परीवार को समझाने म लगे रहे और विपक्षी पार्टियों की भनक से आगे चुनाव को दखते हुये योगीजी नाराजगी पर उतर आये और हत्या का मुकदमा लिखकर डेडबाडी रवानगी का रास्ता बना रुपये दश लाख की राशि का ऐलान भी हुआ लेकिन कानपूर मे अगले दिन योगीजी के कार्यक्रम के कारण अखिलेश यादव सपा व अन्य भी कूद पड़े तो दाह संस्कार मे अड़चनों को दूर करने के लिये कानपूर प्रशासन भी झेलने को विवश हुआ।अभी पेंच फंसा है कि जांच सीबीआई करेगी या जांच गोरखपुर से कानपूर शिफ्ट होगी।

जयप्रकाश वर्मा
प्रभारी दैनिक महराजगंज न्यूज

जयप्रकाश वर्मा

प्रदेश प्रभारी-उत्तर प्रदेश 9415783188

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