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महराजगंज

भारत का ये प्राचीनतम चौसठ योगिनी मंदिर, जिसकी तर्ज पर संसद भवन का निर्माण हुआ था;

मित्रों आज हम बात करते हैं भारत के ऐसे मंदिर के बारे में जिसको देखकर सांसद भवन बनाया है लेकिन इस बात को ना ही किसी किताब में लिखा है और ना इसका जिक्र ही लोगों में होता है यह मंदिर भारत का सबसे अधिक रहस्यमयी मंदिर है क्योंकि सबसे अधिक तांत्रिक यहां पर अपनी तांत्रिक क्रियाएं करते हैं और इस मंदिर को तांत्रिकों का विश्वविद्यालय भी माना जाता है मित्रों आज हम आपको बताते हैं भारत के सबसे रहस्यमयी मंदिर चौसठ योगिनी के बारे में यह मंदिर मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में मितावरण नामक स्थान पर है यह बहुत ही प्राचीन मंदिर है यह भारत के उन मंदिरों में से जो अभी भी अच्छी स्थिति में बचे हुए हैं हमारे भारत में चार चौसठ योगिनी मंदिर है जिसमें से दो मंदिर उड़ीसा में और दो मध्यप्रदेश में है परंतु मध्यप्रदेश के मुरैना स्थिति यह मंदिर बहुत ही प्राचीन मंदिर है .

लगभग 200 सीढ़ियां चढ़ने के बाद इस मंदिर तक पहुंचा जा सकता है यह मंदिर तांत्रिक विद्या के आधार पर बना हुआ मंदिर है इस मंदिर के अंदर चौसठ कमरे बने हैं और हर कमरे के अंदर एक शिवलिंग बना हुआ मन्दिर के बीच में एक खुला हुआ मंडप बनाया गया है जिसके अंदर एक बहुत ही विशालकाय शिवलिंग को स्थापित किया गया इस मंदिर को 1323 में बनाया था इस मंदिर को क्षत्रिय राजाओं ने बनवाया था हर कमरे के अंदर शिवलिंग के साथ देवी योगिनी की मूर्ति को भी रखा गया परंतु कुछ मूर्तियों को चोरी कर लिया गया जिसके कारण बाकी बची हुई मूर्तियों को दिल्ली के संग्रहालय में रख दिया गया यह मंदिर एक सौ एक खंभों पर रुका हुआ है अर्थोर्लॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने इस मंदिर को प्राचीन ऐतिहासिक इमारत घोषित कर दिया है.मित्रों आपको जानकर बहुत ही हैरानी होगी कि ब्रिटिश आर्टिटेक एडवीन लुईस ने इस मंदिर को आधार मानकर दिल्ली के संसद भवन को बनाया और इसके बारे में ना ही किताबों में बताया गया है और ना ही संसद की वेबसाइट पर ऐसी कोई जानकारी आपको मिलेगी, मन्दिर ना केवल बाहर से ही संसद भवन की तरह दिखता बल्कि अंदर से भी वैसा ही है.

मित्रों यहां मंदिर प्राचीन समय से ही तंत्र-मंत्र के लिए बहुत ही प्रसिद्ध है इस वजह से इस मंदिर को तांत्रिक यूनिवर्सिटी भी कहते हैं इस मंदिर के अंदर तांत्रिक सिद्धियां को प्राप्त करने के लिए तांत्रिकों की भीड़ हमेशा लगी रहती है विदेशी लोग भी यहां तंत्र मंत्र की विद्या प्राप्त करने आते हैं आप भी कुछ तांत्रिक सिद्धियां पाने के लिए यहां पर हवन करते हैं इस मंदिर को इंकटेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है इस मंदिर में उपस्थित सभी चौसठ योगिनी माताएं आदि शक्ति कालि का ही रूप है मां काली ने घोर नामक राक्षस से युद्ध करते हुए ये सारे अवतार लिये था इन सभी देवियो मे दस महाविद्याओं और सिद्धि विधियों की गणना की जाती है मित्रो आपको यह जानकर बहुत ही हैरानी होगी कि यह मंदिर आज के समय मे भी शिव की तंत्र साधना के कवच से ढका है तंत्र साधन के लिए प्रसिद्ध इस मंदिर के अंदर शिव की योगनियो को जगाया जाता है इसी कारण यहां पर आज भी किसी को रुकने की अनुमति नही दी जाती यहाँ पर न ही कोई इंसान रुक सकता है और न ही किसी जानवर को रुकने देते हैं।

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